Types of Heart Diseases, Causes & Treatment Hindi

क्यों आजकल युवा हो रहे हैं हृदय रोगों का शिकार, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार | Types of Heart Diseases, Causes & Treatment Hindi

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क्यों आजकल युवा हो रहे हैं हृदय रोगों का शिकार, इसके कारण, लक्षण और घरेलू उपचार Types of Heart Diseases, Causes & Treatment Hindi

आजकल अधिकतर युवाओं को हार्ट अटैक और अन्य हार्ट सम्बन्धी बीमारियां कुछ ज्यादा ही हो रही हैं। इसके साथ साथ सेलेब्रेटी तक भी इससे अछूते नहीं हैं। बिग बॉस विजेता सिद्धार्त शुक्ला और राज कौशल (मंदिरा बेदी के पति) इन दोनों का हाल ही में हृदय आघात से निधन हो गया। ये दोनों अपनी फिटनेस का ध्यान रखने वालों में से थे और युवा थे। आखिर ऐसा क्यों हो रहा कि युवाओं को हृदय सम्बन्धी रोग और हृदय आघात जैसी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है।

हम हृदय सम्बन्धी सभी विषयों पर लिखेंगे कि कितने प्रकार के हृदय रोग होते हैं, किन कारणों से हृदय आघात की समस्या आती है और इसके लक्षण क्या हैं। आजकल हम अपनी जीवनशैली में इतने व्यस्त हो गए हैं कि अपने शरीर का ध्यान रखना तक भूल गए हैं और ऊपर से खान-पान भी इतना अच्छा नहीं है। पेस्टीसिड्स और जंक फ़ूड आदि ने भी हृदय रोगों को बढ़ावा दिया है।

सभी उपाय अपनाकर फिर भी हैं मोटापे से परेशान तो एकबार ये लेख अवश्य पढ़िए

Table of Contents

हृदय का वर्णन और हृदय कैसे काम करता है?

हृदय कार्डियक मांसपेशियों से बना होता है जो एक लयबद्ध तरीके से कॉन्ट्रैक्शन और रिलैक्सेशन करती हैं, यही कॉन्ट्रैक्शन और रिलैक्सेशन हार्ट बीट कहलाती है। हमारा हृदय बीच में न होकर थोड़ा-सा बायीं तरफ होता है और रिब केज से सुरक्षित होता है। हृदय का आकार एक व्यस्क इंसान की मुट्ठी के आकार का होता है और वजन 300 gm तक होता है।

हृदय की बनावट –

हृदय की बनावट

हार्ट कैसे काम करता है – हार्ट एक पंप की तरह कार्य करता है। इस पंप से रक्त पूरे शरीर में आने-जाने का काम करता है। जो भी हम भोजन करते हैं, वह रक्त बनता है और इस पंप के कारण वो रक्त ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में जाता है और लौटते समय कार्बन-डाइऑक्साइड लेकर आता है।

हृदय रोगों के कारण और लक्षण

हृदय रोग कई कारणों से हो सकता है और हार्ट अटैक आने से पहले भी शरीर हमें हिंट दे देता है लेकिन हम उसे नोटिस नहीं कर पाते –

स.कारण लक्षण
1अधिक व्यायाम करना हृदय की गति का बढ़ना
2तीखे पदार्थों का सेवन करना बेहोशी होना
3चिंता करना छाती में पीड़ा होना
4भय करना भोजन में अरुचि होना
5पूर्व में उत्पन्न रोग का उचित उपचार न होना आँखों के सामने अँधेरा होना
6शरीर को कमजोर करने वाले आहार-विहार का सेवन करना हृदयप्रदेश में जलन होना
7पाचन तंत्र कमजोर होना बहुत डर लगना
8वेगों को रोकना शरीर का पीला पड़ जाना
9किसी तरह की चोट लगना गर्मी अधिक महसूस करना और प्यास अधिक लगना

हृदय रोगों के प्रकार (Types of Heart Diseases, Causes & Treatment Hindi)

ज्यादातर लोग हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर को ही हृदय रोगों में गिनते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। हृदय रोगों के कई प्रकार होते (Types of Heart Diseases) हैं, आइये जानते हैं –

  1. एरिथमिया – इसमें दिल की धड़कन का संतुलन बिगड़ जाता है। कभी तो अधिक तेज चलती है और कभी बहुत धीमी। दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाले इलेक्ट्रिक पाइप जब ठीक से कार्य नहीं करते तब ये समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसमें सीने में तेज दर्द होना, बीपी कम हो जाना, बोलने में दिक्क्त और थकान होना इसके लक्षण हैं।
  2. अथेरोस्क्लेरोसिस – यह स्थिति ब्लड क्लॉट की वजह से पैदा होती है। जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता है या डायबिटीज के रोगी उन्हें ये समस्या अधिक होती है। इसमें हृदय तक पूर्ण रूप से खून नहीं पहुंच पाता है। इसके लक्षण हैं – हाथ-पैर में कम्पन होना, सांस लेने में दिक्क्त होना, सर दर्द होना।
  3. दिल में छेद होना – यह बीमारी अक्सर जन्म से ही बच्चों में देखने को मिलती है। इसका इलाज ऑपरेशन के द्वारा ही संभव है।
  4. CAD (Coronary Artery Disease) – हृदय तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाली धमनियों में जब गंदगी जमा हो जाती है तो CAD नामक हृदय रोग उत्पन्न हो जाता है। इसमें सीने में तेज दर्द, बायीं बांह में दर्द, बेचैनी और पसीना अधिक आना इसके लक्षण हैं।
  5. कार्डियोमायोपैथी – इसे ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है। इसे दिल की मांसपेशियां मोटी और कठोर हो जाती हैं। अक्सर ज्यादा तनाव लेने से या एकदम अचानक कोई ख़ुशी होने से इसके लक्षण प्रकट होते हैं। इस बीमारी के कारण ही हार्ट फेल होने का खतरा होता है और हाई बीपी के रोगियों को ज्यादा खतरा होता है।

हृदय रोगों से बचने के लिए घरेलू उपचार

हमें अपनी दिनचर्या में कुछ बदलाव करने चाहिए और कुछ आयुर्वेदिक घरेलू उपचारों की सहायता लेनी चाहिए जिससे हम हृदय रोगों से बच सकें।

आंवला

हर्रे, सोंठ, पोहकरमूल, गुरुच, आंवला – इनको समान मात्रा में लेकर और इसमें उचित मात्रा में कालानमक और हींग मिलाकर विधिपूर्वक घी में पकाएं। इससे आपके हृदय और पसलियों के दर्द में राहत मिलेगी और जो हृदय पर भारीपन महसूस होता है, वह भी ठीक होगा।

वायविडंग और अतीस

कुछ लोगों को भोजन करने के बाद हृदय में दर्द शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में वायविडंग, अतीस, देवदारु, कूठ, तिल्वक, सेंधानमक, सोंचरनमक के समभाग का चूर्ण गर्म जल से सुबह-शाम सेवन करना चाहिए।

सेब का मुरब्बा

सेब का मुरब्बा 50 ग्राम चांदी के दो वर्क लगाकर सुबह के समय सेवन करें। दिल की कमजोरी, दिल का बैठना ठीक करेगा। 15 दिन तक नियमित सेवन करें।

अर्जुन की छाल से होगा हृदय रोगों का अंत

अर्जुन की छाल का प्रयोग हृदय रोगों को ठीक करने में सबसे उपयोगी है। इसके लिए आपको अर्जुन की छाल को 1 गिलास पानी में उबालना है, जब वो 1/4 रह जाए तो उसे छान लें तथा उसमें चाहे तो थोड़ा-सा दूध मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें। इससे आपके हृदय की हर समस्या का अंत होगा।

दूसरा तरीका है अर्जुन की सूखी छाल का चूर्ण करके 5 ग्राम चूर्ण को 1 गिलास पानी में पकाएं, जब 1/2 गिलास बच जाए तो इसमें थोड़ा-सा दूध मिलाकर पीएं। इससे हृदय की शक्ति और कार्य करने की क्षमता बढ़ेगी।

लौकी का रस

लौकी विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर है और हृदय रोगियों के लिए तो रामबाण है। इसमें मौजूद पोटैशियम आपके बीपी को नियंत्रित करता है और साथ ही हृदय को मजबूत बनाता है।

लौकी का जूस निकालने से पहले देख लें कि लौकी कड़वी न हो। लौकी का रस 1 गिलास लें और उसमें 1 चम्मच अदरक का रस मिलाएं और इसे नित्य 30 दिन तक सुबह-शाम पीएं। इससे आपकी धमनियों में फंसा प्लाक साफ़ होगा और कोलेस्ट्रॉल संबंधी समस्या भी दूर होगी।

एक्यूप्रेशर पॉइंट

हृदय रोगों को ठीक करने के लिए एक्यूप्रेशर पॉइंट भी बहुत उपयोगी है। हमारी हाथ की सबसे छोटी ऊँगली के नीचे जो गहरी रेखा होती है उसके थोड़ी-सी ऊपर हल्का-हल्का दबाव देने से हृदय रोग ठीक किये जा सकते हैं।

बादाम रोगन से मालिश करें

बादाम रोगन से अपने पैरों के तलवों और सिर की मालिश करें। इससे आपके हृदय का स्वास्थ्य उत्तम होगा और कोई भी हृदय सम्बन्धी रोग आपके आस-पास नहीं आएगा। सबसे उत्तम समय मालिश का रात को सोने से पूर्व का है।

हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये संकेत

एक महीना पहले ही शरीर कुछ ऐसे संकेत देने लगता है कि जिससे हम पता लगा सकते हैं कि हमार दिल स्वस्थ नहीं है और हार्ट अटैक हो सकता है। आइये जानते हैं वो संकेत क्या हैं –

  • ज्यादा गर्मी न होने पर और मेहनत का कार्य न करने पर भी पसीना आना
  • सीने में दर्द, जकड़न और सांस लेने में मुश्किल होना
  • बार-बार गले, कंधे और शरीर में जकड़न होना और जबड़ों में भारीपन लगना
  • सीने के बीचों-बीच 15-20 मिनट तक यदि तेज दर्द बना रहे तो समझिये हृदय आघात का संकेत है
  • बायीं बाजू में लगातार कई दिनों तक दर्द रहना भी हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है

हृदय रोगों से बचने के लिए कैसी दिनचर्या रखनी चाहिए

यदि हम अपनी दिनचर्या में कुछ सामान्य बदलाव करें और अपने खान-पान का ध्यान रखें तथा नियमित व्यायाम करें तो हम हृदय रोगों से बच सकते हैं –

  • नियमित योग और प्राणायाम करें
  • भोजन में ट्रांस-फैट, रिफाइंड शुगर और तली-भुनी चीजों का प्रयोग न करें
  • ताजे फल और सब्जियां अवश्य खाएं
  • जो लोग व्यायाम नहीं कर सकते वो पैदल चलें या खुलकर हँसे
  • पर्याप्त नींद लें
  • अधिक व्यायाम न करें क्यूंकि किसी भी चीज की ‘अति’ खराब होती है
  • पैक्ड फ़ूड और जंक फ़ूड का सेवन बंद कर दें
  • घी और मक्खन नियमित मात्रा में खाएं
  • भोजन के तुरंत बाद तुरंत न सोएं

क्यों आजकल युवाओं को भी हृदय आघात हो रहा है

हाल ही में बिग बॉस विजेता सिद्धार्त शुक्ल का हार्ट अटैक से निधन हो गया। देखने में बिल्कुल फिर एंड फाइन थे और कोई उम्मीद भी कर सकता था कि अपनी फिटनेस का ध्यान रखने वाले एक युवा अभिनेता को भारत देश खो देगा। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं कि भारतीय युवा आजकल हृदय रोगों का अधिक शिकार हो रहे हैं। आइये जानते हैं –

  • तम्बाकू, शराब आदि का सेवन
  • दिनभर बैठे रहना
  • देर तक कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना
  • प्रदूषण की वजह से
  • कम्पटीशन की वजह से अधिक तनाव लेना
  • शारीरिक हिम्मत से ज्यादा व्यायाम करना
  • जेनेटिक कारणों के कारण
  • डॉ निशांत त्रिपाठी कहते हैं कि जो लोग जिम करते हैं उन्हें किसी भी प्रकार के स्ट्रेओइड से दूर रहना चाहिए। क्यूंकि ये भी बहुत बड़ा कारण है युवाओं में हृदय आघात का

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीयों को हृदय रोगों का खतरा अधिक क्यों होता है?

उत्तर – lipoprotein(a) नाम का एक कारक तत्व होता है जो भारतीय जनसंख्या के खून में ज्यादा पाया जाता है और इसी वजह से भारतीयों में विदेशियों की तुलना में हृदय रोग अधिक होते हैं।

प्रश्न – हार्ट अटैक सबसे ज्यादा दिन के समय क्यों होता है?

उत्तर – महृषि वाग्भट्ट जी कहते हैं कि जैसे जठराग्नि का कार्य करने का सबसे अच्छा समय है सूर्योदय के 2 घंटे बाद तक और वैसे ही हृदय के कार्य करने का सबसे उत्तम समय है ब्रह्ममुहूर्त से कुछ देर पहले तक। इसलिए सुबह के समय अधिक हार्ट अटैक आते हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि सुबह के समय हृदय अधिक सक्रिय होता है, इसलिए बिस्तर से उठते समय झटके से न उठें और हमेशा बायीं करवट लेकर ही बिस्तर से उठें।

प्रश्न – हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?

उत्तर – हार्ट अटैक में इंसान के सीने में बहुत तेज दर्द होता है, पसीना और बेचैनी बढ़ जाती है। दर्द इतना होता है कि वह अपने सीने को जोर से पकड़ लेता है और कई बार जमीन पर गिर जाता है लेकिन बेहोश नहीं होता।
कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति गिर जाता है और बेहोश हो जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति को फर्स्ट ऐड के रूप में CPR( Cardio-pulmonary-resuscitation) देना चाहिए।

प्रश्न – नसों की ब्लॉकेज खोलने के लिए क्या आयुर्वेदिक उपचार करें?

उत्तर – लहसुन नसों की ब्लॉकेज खोलने के लिए बहुत उपयोगी है। ये ब्लड को पतला करके उसके प्रवाह को बढ़ाता है और जो धमनियों में प्लाक जमा होता है उसे साफ़ करने में भी कारगर है।


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