Sunday, May 22, 2022
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सिज़ोफ्रेनिआ के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार | Schizophrenia Ayurvedic Treatment in Hindi

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Schizophrenia Ayurvedic Treatment in Hindi सिज़ोफ्रेनिआ के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार

मानसिक विकारों में एक विकार सिज़ोफ्रेनिआ है जिसमें व्यक्ति का मन टूट जाता है। उसे कुछ अच्छा नहीं लगता और वह अपनी सुद्ध-बुद्ध भी खो देता है। लगभग 1 प्रतिशत लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं। डिप्रेशन और एंग्जायटी के बाद यदि किसी मानसिक बीमारी को खतरनाक माना जाता है तो सिज़ोफ्रेनिआ को ही माना जाता है। क्यूंकि इसमें व्यक्ति को अपनी फ़िक्र ही नहीं रहती और न ही वह किसी रिश्ते को अपना समझता है।

महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ये रोग अधिक देखा जाता है और 30 वर्ष की आयु के बाद ही जाता होता है। लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि आयुर्वेद में सिज़ोफ्रेनिआ को (Schizophrenia Ayurvedic Treatment in Hindi) ठीक करने का उपचार है, लेकिन पहले जानेंगे सिज़ोफ्रेनिआ क्या है, इसके कारण और लक्षण।

सिज़ोफ्रेनिआ रोग क्या है (Schizophrenia Meaning)

सिज़ोफ्रेनिआ रोग को मनोविदलता भी कहा जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति का मन बुझा-बुझा रहता है। उसे किसी बात की परवाह नहीं होती, न ही वह रिश्तों को कुछ समझता है, न ही अपने शरीर की सफाई करता है। रस्सी को सांप समझने लगता है और मन में आने वाली सभी कल्पनाओं को सच मानने लगता है। वह व्यक्ति हमेशा भ्रम की स्थिति में ही रहता है।

मनोविदलता के लक्षण

मनोविदलता के लक्षण (schizophrenia symptoms) निम्नलिखित हैं –

स. लक्षण
1 व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है
2 उससे बात करने पर जवाब नहीं देता है
3 व्यक्ति ख़ुशी के माहौल में भी उदास रहता है
4 उसके हाव-भाव भी अलग तरह के होने लगते हैं
5 मरीज न नहाता है और न साफ़-सफाई का ध्यान रखता है
6 किसी अन्य व्यक्ति से बहुत ज्यादा ईर्ष्या करना
7 मरीज स्वयं को या दूसरों को चोट भी पहुंचा सकता है
8 रोगी को कानों में आवाज़ें सुनाई देती हैं और कई तरह के चित्र भी दिखते हैं
9 नींद भी नहीं आती

सिज़ोफ्रेनिआ का आयुर्वेदिक उपचार (Schizophrenia Ayurvedic Treatment in Hindi)

आयुर्वेद में मनोविदलता का उपचार बहुत ही आसानी से किया जाता है। आइये जानते हैं कैसे –

ब्राह्मी और हींग

हींग, हिंगपुत्री, छोटी इलाइची और ब्राह्मी – इन सभी को सामान मात्रा में लेकर चूर्ण कर लें। जितना भी चूर्ण तैयार हो उससे चार गुना ज्यादा गाय का घी और घी से चार गुना ज्यादा पानी डालकर पकाएं। इसमें से जब पानी सूख जाए तो इसे चूल्हे से उतार लें। इस घी का सुबह शाम एक-एक चम्मच सेवन करने से सिज़ोफ्रेनिआ रोग का अंत होता है।

बादाम का तेल

बादाम का तेल दिमाग की शक्ति को बढ़ाने में बहुत उपयोगी है। आपको बादाम के तेल की 2-2 बूँदें नाक में डालें और खींच लें। इसके साथ ही हफ्ते में 2 बार इस तेल की सिर पर अच्छे से मालिश करें। मनोविदलता में हितकर है।

लहसुन और हर्रा

छिले हुए लहसुन (100), निर्बीज हर्रे (30), सोंठ-मरिच-पीपर तीनों मिलाकर (50 ग्राम), गाय का दूध (3 लीटर), गोमूत्र (3 लीटर) और पुराना घी (768 ग्राम) – इन सबको एक साथ डालकर घृतपाक विधि से पकाएं और घी तैयार होने पर सावधानी से गर्म-गर्म ही छानकर रख लें। जब घी ठंडा हो जाये, तब शुद्ध हींग का बारीक चूर्ण (50 ग्राम) और शहद (384 ग्राम) डालकर अच्छे से मिला लें। इस घी का 1 चम्मच पीने से, मालिश करने से और नस्य लेने से सिज़ोफ्रेनिआ रोग शीघ्र नष्ट हो जाता है।

बादाम और अखरोट

बादाम (100 ग्राम), अखरोट (100 ग्राम), खीरे के बीज, खरबूजे के बीज, ककड़ी के बीज और तरबूज के बीज (प्रत्येक 100 ग्राम)- इन सभी को चट्टू में अलग-अलग कूटकर चूर्ण बना और फिर किसी साफ़-सुथरे कांच के बर्तन में अच्छे से मिलाकर रख दें। सुबह-शाम 1-1 चम्मच खाना खाने के 45 मिनट बाद सेवन करें। मतिभ्रम, मनोविदलता बिल्कुल ठीक हो जायेगी।

अश्वगंधा और शतावर

अश्वगंधा की जड़ (100 ग्राम), ब्राह्मी घास (100 ग्राम), शतावर (100 ग्राम), तगर (100 ग्राम) और सर्पगंधा की जड़ (100 ग्राम) – इन सभी को अलग-अलग कूटकर चूर्ण कर लें। इसका सेवन सुबह-शाम भोजन के 1 घंटे बाद गाय के दूध के साथ सेवन करें। सिज़ोफ्रेनिआ का रोग जड़ से खत्म हो जाएगा।

सुगंधित द्रव्यों का लेपन

चंदन आदि सुगंधित द्रव्यों का प्रलेप, उबटन और अभ्यंग लगाने से मनोविदलता के रोगी का मन, बुद्धि और स्मृति एवं उसके होश-हवास जाग्रत हो जाते हैं।

मानसिक रोग में क्या खाएं

आयुर्वेद के अनुसार मानसिक रोग में निम्नलिखित खाद्यपदार्थों का सेवन करें –

  • पुराना गेहूं और पुराना घी उत्तम है
  • लाल अगहनी का चावक खाएं
  • मूंग की दाल का सेवन फायदेमंद है
  • गाय का दूध भी उत्तम है
  • लौकी, बथुआ अवश्य खाएं
  • नारियल और आम का सेवन भी लाभकारी है
  • मृदुवीर्य पदार्थों का सेवन हितकारी है

निष्कर्ष

उपर्युक्त जितनी भी औषधियों (Schizophrenia Ayurvedic Treatment in Hindi) के बारे में बताया गया है, उसका प्रयोग किसी कुशल वैद्य के निरिक्षण में ही करें क्यूंकि रोगी के बल अनुसार ही इसकी मात्रा तय की जाती है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – क्या सिज़ोफ्रेनिआ से ग्रसित लोग ठीक होते हैं?

उत्तर – जी बिल्कुल आयुर्वेद में सिज़ोफ्रेनिआ को जड़ से समाप्त करने का इलाज है लेकिन ये इलाज थोड़ा लम्बा चलता है। इसलिए आपके मनोचिकित्सक ने जो दवाई आपको दी है, आप आयुर्वेदिक औषधि के साथ उसका सेवन भी करते रहें।

प्रश्न – क्या अश्वगंधा से पागलपन का इलाज सम्भव है?

उत्तर – जी हाँ, अश्वगंधा और शतावर मिलाकर रोगी को आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से खिलाएं तो अवश्य ही पागलपन में राहत मिलती है।

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