Thursday, January 20, 2022
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लड़कों की पतली आवाज़ के कारण और इसका प्राकृतिक उपचार | Puberphonia Treatment at Home in Hindi

लड़कों की पतली आवाज़ के कारण और इसका प्राकृतिक उपचार Puberphonia Treatment at Home in Hindi

जब बच्चे छोटे होते हैं तो उनकी आवाज़ पतली होती है। जैसे जैसे बड़े होते हैं, खासकर 15 वर्ष के बाद तो उनकी आवाज़ में बदलाव आता है। लकड़ों की आवाज़ पहले की अपेक्षा थोड़ी मोटी हो जाती है। लकड़ियों की आवाज़ में थोड़ा-बहुत बदलाव आता है। परन्तु कुछ लड़कों की आवाज़ पतली ही रह जाती है और आस-पास के लोग और मित्र उनका मजाक भी उड़ाते हैं। कुछ समय पहले तक puberphonia का इलाज करना मुश्किल था लेकिन आज के समय आप घर पर ही कुछ यौगिक क्रियाओं, स्पीच थेरेपी, मसाज और घरेलू नुस्खों (Puberphonia Treatment at Home in Hindi) द्वारा इसका इलाज कर सकते हो।

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Puberphonia क्या है?

16-17 वर्ष की आयु के बाद भी यदि लड़कों की आवाज़ पतली रह जाती है यानि महिलाओं जैसी आवाज़ हो जाती है तो उसे puberphonia कहते हैं। ऐसी अवस्था को म्युटेशनल फाल्सेटो या फंक्शनल फाल्सेटो भी कहते हैं।

आवाज़ पतली होने के कारण और लक्षण

अब जानते हैं puberphonia के कारण और लक्षण –

स.कारण लक्षण
1 टेस्टेरोन होर्मोन की कमी के कारण आवाज़ का कर्कश होना
2 भावनात्मक रूप से परेशानी के कारण ज्यादा ऊँचा बोलने में कठिनाई होना
3 थाइरोइड लमिने का पूर्णतया विकसित न होना मुख से दोहरी आवाज़ निकलना – कभी मध्यम और कभी ऊँची
4 सेक्सुअल मैच्युरिटी का देरी से विकास चेहरे में थकान लगना
5 तेज बोलने पर सांस फूलना

पतली आवाज़ को मोटी करने के कुछ घरेलू तरीके (Puberphonia Treatment at Home in Hindi)

आवाज़ को मोटी करने के लिए और कर्कश आवाज़ को अच्छा करने के लिए आपको कुछ यौगिक, आयुर्वेदिक और प्राकृतिक तरीके बताएंगे जिससे कुछ ही महीनों में आपकी आवाज़ सुरीली और मोटी हो जायेगी –

लम्बी गहरी सांस लें यानि प्राणायाम करें। इससे फेफड़े शक्तिशाली बनेंगे और आप ज्यादा देर तक बोलने में भी सक्षम बनेंगे। इसके साथ ही आपके गले की मांसपेशियां भी खुलेंगी और आवाज़ में भारीपन आएगा। 
गुब्बारा फुलाने का अभ्यास करें। अभी हाल ही में कोरोना से निपटने के लिए चिकित्सकों ने गुब्बारा फुलाने का अभ्यास को कहा था क्यूंकि इससे भी फेफड़ों को शक्तिशाली बनाया जा सकता है और आवाज़ में भारीपन लाया जा सकता है। 
शंख बजाएं। ये आवाज़ को भारी करने के साथ-साथ उसे सुरीला भी बनाएगा। इसके साथ ही शंख बजाने से चेहरे की मांसपेशियों का भी व्यायाम होता है जिससे झुर्रियां नहीं पड़ती और चेहरे लम्बे समय तक जवान बना रहता है। 
सा रे गा मा पा धा नी सा सा नी धा पा मा गा रे सा - इसे नी तक तेज बोलना है और फिर धीरे-धीरे बोलना है। इसे लो टू हाई पिच और हाई टू लो पिच का अभ्यास कहते हैं। इससे पतली आवाज़ कुछ ही दिनों में भारी होने लगती है। 
मुलहठी का चूर्ण (चुटकी भर) शहद मिलाकर नित्य चाटें। इससे आवाज़ में जो कर्कशता होगी वह दूर हो जायेगी और धीरे-धीरे पतली आवाज़ में भारीपन आने लगेगा। हालाँकि ये नुस्खा आवाज़ को सुरीला बनाने के लिए है। ये इसलिए बताया गया है क्यूंकि सा रे गा मा का अभ्यास करने में लाभ मिलेगा। 
सिंहासन योग और भ्रामरी प्राणायाम - इनका अभ्यास किसी अच्छे योग शिक्षक के सान्निध्य में करें। ये दो ऐसी यौगिक क्रियाएं जो आपके वोकल कॉर्ड को खोल देंगी और पतली आवाज़ को भारी करने के साथ सुरीला भी बनाएंगी। 
ॐ का उच्चारण - इस मन्त्र का उच्चारण करें। इसके लिए पहले नाभि तक लम्बी गहरी सांस लें और फिर नाभि से ही ॐ बोलना शुरू करें। ये प्रयोग आपकी आवाज़ में आश्चर्जनक लाभ पहुंचाएगा। 
मत्स्यासन योग अवश्य करें - इस योगासन को करने से गले की मांसपेशियां रिलैक्स होती होती हैं और खुलती भी हैं, जिससे गले सम्बन्धी रोग ठीक होते हैं और साथ ही पतली आवाज़ में भी भारीपन लाया जा सकता है। 

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