Saturday, May 28, 2022
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गर्दन में दर्द होने के कारण और 7 घरेलू उपाय | Neck Sprain Home Remedies in Hindi

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गर्दन में दर्द होने के कारण और 7 घरेलू उपाय Neck Sprain Home Remedies in Hindi

क्या आप भी मोटा तकिया सिर के नीचे रखते हैं? क्या आप लम्बे समय तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठकर काम करते हैं? या कोई व्यायाम करते समय गर्दन में मोच आ गयी है? यदि इनमें से या अन्य कोई वजह से आपकी गर्दन में जकड़न या मोच आ गयी है जिसके कारण neck pain हो रहा है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि आप बिल्कुल सही जगह आये हैं। यहाँ आपको घरेलू, यौगिक और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में बताएंगे जिससे आपकी गर्दन में होने वाले दर्द से आपको जल्दी राहत मिल जायेगी। लेकिन पहले जानेंगे गर्दन में दर्द के कारण और गर्दन की नस दबने के लक्षण।

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गर्दन में दर्द के कारण

घंटो लगातार लैपटॉप पर टकटकी जमाये रखना आजकल गर्दन दर्द का बहुत बड़ा कारण हो गया है। लेकिन इसके अलावा भी अन्य कारण हैं। आइये जानते हैं –

स.कारण
1 गलत पोजीशन में बैठना और सोना
2 बहुत अधिक तनाव लेने के कारण
3 गर्दन की हड्डियों में चोट लगना
4 स्पाइनल कैनाल से निकलने वाली नस का दब जाना
5 अधिक भार को सिर पर उठाना
6 मोबाइल को सिर झुकाकर घंटों तक देखना
7 ज्यादा बड़ा तकिया लेकर होना
8 सर्वाइकल की वजह से

गर्दन की नस दबने के लक्षण

गर्दन की नस दबने के लक्षण

गर्दन में दर्द का घरेलू उपचार (Neck Sprain Home Remedies in Hindi)

कुछ साधारण से घरेलू उपाय आजमाकर आप अपनी गर्दन दर्द को ठीक कर सकते हैं। आइये जानते हैं –

हींग और अजवाइन को बराबर मात्रा में लें और किसी साफ़ सूती कपड़े में डालकर तवे पर हल्का गर्म कर लें। अब इससे अपनी गर्दन और कंधों की सिकाई करें। ये दर्द को चूस लेता है और काफी राहत दिलाता है। 
जायफल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द और सूजन को दूर करने में बहुत उपयोगी है। आपको जायफल को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर पेस्ट बना लेना है और इस पेस्ट को अपनी गर्दन पर लगाना है। आप चाहे तो सरसों का तेल मिलाकर भी लगा सकते हैं। 
अदरक, सौंफ और जीरा - तीनों समभाग लेकर 1 लीटर पानी में उबाल लें। तत्पश्चात छानकर किसी थर्मस में भरकर रख लें और दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीते रहें। वात कुपित होने की वजह से यदि दर्द है तो उसके लिए रामबाण है और इसके साथ-साथ वजन को भी नियंत्रित रखेगा। 
अरंडी के तेल को हल्का गर्म करके उसकी गर्दन और कंधों पर हल्के हाथों से मालिश करें। ऐसा नियमित करने से गर्दन का दर्द ठीक हो जाता है। 
1 गिलास दूध में थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर रात को पीएं और गर्दन को किसी गर्म कपड़े से ढककर सो जाएँ। हल्दी में भी दर्द को कम करने के सभी गुण मौजूद होते हैं। 

गर्दन दर्द का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेद में कारण को जानकर ही गर्दन दर्द का इलाज किया जाता है। ग्रीवा बस्ति एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे गर्दन दर्द को ठीक करने के लिए पुराने समय से प्रयोग किया जाता रहा है। आइये जानते हैं इसे कैसे किया जाता है –

करने का तरीका – इसमें उड़द के दाल का आटा गूंधकर उसे रिंग का आकार दिया जाता है। फिर मरीज को पेट के बल लेटाकर उसकी गर्दन पर इसे रखा जाता है। इसके बाद इसमें गुनगुना तेल डाला जाता है, जब तेल ठंडा हो जाता है तो उसे निकालकर फिर गुनगुना तेल डाला जाता है। इस प्रक्रिया को 30 से 45 मिनट तक किया जाता है।

गर्दन दर्द के लिए योग

घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार के बाद अब बात करते हैं योग की, क्यूंकि योग के माध्यम से आप अपनी गर्दन दर्द को बहुत जल्दी ठीक कर सकते हैं।

  • सर्वप्रथम सूक्ष्म क्रिया का अभ्यास करिये
  • अब श्वास लेते हुए गर्दन को पीछे लेकर जाएँ और थोड़ी देर रुकें और सांस छोड़ते हुए आगे लेकर आएं। इस क्रिया को 5 बार अवश्य करें
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए अपनी ठोडी को दाएं कंधे की ओर ले जाएँ और पीछे की तरफ देखें, अब सांस भरते हुए वापिस आएं। ऐसे ही बायीं तरफ भी करें। इस क्रिया को भी 5 बार करें।
  • बेड पर या किसी मंजी पर सीधे लेट जाएँ और सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लटका लें। इस स्थिति में श्वास सामान्य रखें और कम से कम 2 मिनट तक रुकें। यदि कोई चक्कर नहीं आ रहे तो 3 मिनट तक भी रुक सकते हैं।
  • जब भी बिस्तर से उठें तो बायीं करवट लेकर ही उठें।
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम अवश्य करें।

निष्कर्ष

गर्दन दर्द के कारण को समझकर ही उसका उपचार किया जाता है। आप घरेलू नुस्खों का प्रयोग कर सकते हैं लेकिन आयुर्वेदिक और यौगिक क्रियाएं आपको किसी अच्छे चिकित्स्क और योग गुरु से पूछकर ही करनी चाहिए।

सामान्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न – गर्दन दर्द में क्या खाएं?

उत्तर – शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होता है तो उसका कारण वात कुपित होना होता है। इसके लिए आपको स्निग्ध आहार का सेवन करना चाहिए जैसे दूध, घी, पनीर आदि।

प्रश्न – गर्दन की नस दबने से क्या होता है?

उत्तर – जब गर्दन की नस दब जाती है तो हाथों और पैरों में भी सुन्नता आ जाती है और झनझनाहट महसूस होती है। इसलिए गर्दन दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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