बारिश के मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं

बारिश के मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं | Monsoon me kya khaye or kya na khaye

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बारिश के मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं Monsoon me kya khaye or kya na khaye

बारिश के मौसम में अक्सर बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है क्यूंकि एकदम तेज धूप के बाद बारिश आना वातावरण में नमी पैदा कर देता है, जिससे वात आदि सभी दोष प्रकुपित होते हैं, जिसकी वजह से पाचन शक्ति पर गहरा असर पड़ता है।

पाचन शक्ति पर असर पड़ने से खाना ठीक से नहीं खाया जाता जिससे इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। इस मौसम में मछरों का आक्रमण भी ज्यादा होता है जिससे डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड होने का अधिक खतरा रहता है।

इस मौसम में जठराग्नि दुर्बल हो जाती है जिससे भूख कम लगती है और शरीर भी दुर्बल हो जाता है। इसलिए इस मौसम में खान-पान का महत्व बढ़ जाता है। आगे हम जानेंगे कि मानसून में क्या खाएं और क्या न खाएं?

लेकिन उससे पहले कुछ जरूरी टिप्स जान लेते हैं जिन्हें हमें बारिश के मौसम में जरूर फॉलो करना चाहिए

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मानसून में बीमारी से बचने के घरेलु टिप्स

चरक संहिता में वर्षा ऋतु में कुछ ऐसे टिप्स बताये गए हैं जिन्हें हमें अवश्य फॉलो करना चाहिए ताकि हमारा स्वास्थ्य ठीक रहे –

1.वर्षा ऋतु में जल मिला सत्तू नहीं खाना चाहिए।
2आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में दिन में सोना निषेध है।
3जब ओस गिर रही हो उस समय बाहर नहीं रहना चाहिए।
4धूप का सेवन और व्यायाम आदि छोड़ देना चाहिए।
5मैथुन कर्म भी नहीं करना चाहिए।
6इस ऋतु में शरीर को भिगोये हुए वस्त्र से रगड़ना चाहिए।
7उबटन लगाना चाहिए ताकि शरीर की गंदगी साफ हो सके।
8स्नान करके चंदन आदि सुंगंधित द्रव्यों का लेप लगाना चाहिए।
9 गले में स्फटिक की माला भी धारण करनी चाहिए।
10हलके और निर्मल वस्त्र ही धारण करें और सीलन रहित (सूखे) स्थान पर ही निवास करें।

मानसून में क्या खाना चाहिए?

इस ऋतु में प्रधान रूप से वायु का ही प्रकोप होता है। इसलिए वर्षा में त्रिदोषघ्न और अग्निदीपक अन्न-पान करना चाहिए। वातप्रकोप की शांति के लिए अम्ल, लवण तथा स्नेहयुक्त पदार्थों का सेवन हितकर है।

अम्ल रस प्रधान भोजन

अम्लरस वाले द्रव्य – अम्लरस प्रधान भोजन वे होते हैं जिनमें खट्टापन होता है जैसे आंवला, इमली, कच्चा आम, करौंदा, अनार आदि। बारिश के मौसम में जठराग्नि मंद पड़ने के कारण भूख कम हो जाती है, परन्तु इन रस पदार्थों से भोजन स्वादिष्ट और मन को अच्छा लगने वाला बनता है तथा भूख में भी वृद्धि करता है।

इस रस के पदार्थ जल्दी पच जाते हैं और भोजन को निगलने में सहायक होते हैं। यह हमारे पाचन क्रिया को सुधारते हैं जिससे मल-मूत्र अच्छे से आता है। साथ ही यह आँतों की बढ़िया ढंग से सफाई भी करते हैं जिसकी वजह से पुरीष (stool) में गंध नहीं आती।

सावधानी – जिन व्यक्तियों को जोड़ों का दर्द, खांसी, त्वचा रोग या गले की कोई बीमारी है, वह इन रस वाले पदार्थों का सेवन न करे।

लवण रस वाले पदार्थ

लवण रस वाले द्रव्य – इनमें सेंधा नमक, कृष्ण, काला नमक आदि मुख्य पदार्थ होते हैं। यह वात की गति को नीचे की ओर ले जाते हैं। यह आपकी जठराग्नि को भी व्यवस्थित रखते हैं, इसके आपको जौ, गेहूं का आटा तथा चावल के भात को संस्कृत (नमक, जीरा, हींग, लहसुन आदि डालकर छौंके हुए) यूषों के साथ खाना चाहिए।

सावधानी – अधिक मात्रा में सेवन करने से यह पित्तवर्धक होते हैं। जिन्हे उच्च रक्तचाप, आँखों के रोगी और त्वचा के रोगी इसका कम से कम सेवन करना चाहिए।

स्नेहयुक्त/ तैलयुक्त भोजन

इसमें तेल, घी, वसा और मज्जा – चरक संहिता में ये 4 प्रकार के स्नेह बतलाये गए हैं। ये शरीर को स्निग्ध करते हैं, जीवनीय शक्ति (Vitality) को बढ़ाते हैं, बल को बढ़ाते हैं, वर्ण को निखारते हैं और शरीर के उपचय (संगठन) को बढ़ाते हैं। ये वात, पित्त और कफ के प्रयोग को हटाते हैं।

सावधानी – जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल की शिकायत है या हार्ट का कोई ऑपरेशन हुआ है तो वे इन चीजों का सेवन न करें या किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श करके ही इनका सेवन करें।

बारिश के मौसम में क्या नहीं खाना चाहिए?

बारिश के मौसम यानि मानसून में हम खाने-पीने का ध्यान रखकर आने वाली बिमारियों से बच सकते हैं। तो आइये जानते हैं कि किन फूड्स को हमें इग्नोर करना चाहिए।

1. दूध

हैरान मत होइए, क्यूंकि इस मौसम में बारिश होने के कारण कई कीड़े-मकोड़े पैदा हो जाते हैं और गाय, भैंस घास चरते समय इनको भी खा जाती हैं। जिसके कारण आपने भी नोटिस किया होगा कि इस मौसम में दूध की क्वालिटी भी कम हो जाती है, जिनके घर गाय-भैंस है वो इसे ज्यादा बेहतर जानते होंगे।

इसका एक आध्यात्मिक कारण भी बताता हूँ कि सावन के महीने में शिवलिंग से दुग्धाभिषेक किया जाता है, वो इसलिए भी है कि हम इन दिनों स्वयं दूध न पीकर शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें।

2. स्ट्रीट फ़ूड भी avoid करें –

इस मौसम में नमी बढ़ने के कारण जो खाना है वो मानसून की हवा के सम्पर्क में आता है जिससे बहुत से कीटाणु उससे चिपक जाते हैं, जो हमारे पेट में जाकर स्वास्थ्य खराब करते हैं। इन दिनों आप घर पर ही अपने लिए कुछ अच्छी dishes बनाकर खाएं और बाहर का सड़क किनारे मिलने वाला फ़ूड छोड़ दें।

3. सोडा आदि सॉफ्ट ड्रिंक्स न पियें –

जैसा कि मैं बता चूका हूँ इन दिनों जठराग्नि पहले ही मंद होती है और वात भी कुपित होता है। तो इसलिए कोई भी ऐसी चीज जिसमें ज्यादा मात्रा में गैस हो, उसे न पियें क्यूंकि ये आपकी अग्नि को ज्यादा मंद करके आपके पाचन तंत्र को खराब कर देगी। जिसके कारण आपका शरीर दुर्बल हो जाएगा। इन दिनों घर पर ही नीम्बू पानी या कोई मीठा शर्बत पीएं जो आपके स्वास्थ्य को अच्छा रखे।

4. हरी-पत्तेदार सब्जियां न खाएं –

बारिश होने से पत्तों में कीड़ा जल्दी लग जाता है, इस कारण इन सब्जियों का सेवन इस मौसम में करें तो आपके स्वास्थ्य के लिए उचित होगा। हल्की सब्जियां जैसे घीया, टिंडे, तोरी आदि सब्जिया अपनी डाइट में शामिल करें क्यूंकि जठराग्नि मंद होने पर भी यह जल्दी हजम हो जाती हैं।

5. चाय-कॉफ़ी के सेवन से परहेज करें –

आप भी सोच रहें होंगे कि चाय और पकोड़े का मजा तो बारिश के मौसम में ही आता है और वही आप खाने से मना कर रहे हो तो क्या करूं मुझे आपकी सेहत का भी तो ध्यान रखना है।

इस मौसम में कभी धूप कभी बारिश के कारण शरीर पहले ही दुर्बल होता है और ऊपर से चाय-कॉफ़ी के सेवन से ये शरीर को dehydrate करता है। इसलिए इस मौसम में जहाँ तक हो सके चाय-कॉफी avoid करें।

निष्कर्ष

कैसा लगा ये ब्लॉग? उम्मीद करता हूँ कई नई बातें जानने को मिली होंगी। आप भी इन टिप्स को फॉलो करें और अपना एक्सपीरियंस शेयर करें कि पहले मानसून और इस मानसून में आपको क्या फर्क नजर आया। धन्यवाद।

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