Saturday, May 28, 2022
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भगन्दर का पक्का इलाज घरेलू तरीकों से कैसे करें? | How to Cure Fistula Permanently at Home in Hindi

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भगन्दर का पक्का इलाज घरेलू तरीकों से कैसे करें? How to Cure Fistula Permanently at Home in Hindi

भगन्दर एक बहुत ही भयंकर और दर्दनाक रोग है। भयंकर इसलिए है क्यूंकि इसे न कह सकते हैं और न सह सकते हैं। गुदा के चारों ओर का भाग अधिक मुलायम होता है। वहां जब फुंसी होती है और फूटती है तो मवाद निकलने लगता है और घाव बन जाता है और उसे ही भगन्दर कहते हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में फिस्टुला (Fistula) नाम है।

भगंदर का पक्का इलाज घरेलू तरीकों से कैसे करें?(How to Cure Fistula Permanently at Home in Hindi) इसी विषय में हम आगे जानकारी देंगे लेकिन उससे पहले जानेंगे भगन्दर किन कारणों से होता है और इसके लक्षण क्या हैं? फिस्टुला का स्थाई इलाज क्षारसूत्र द्वारा किया जाता है। ये आयुर्वेद में एक तरह की सर्जरी ही है।

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भगंदर के कारण और लक्षण

भगंदर होने की बहुत सी वजह हो सकती हैं –

भगंदर के कारण और लक्षण

भगंदर को जड़ से खत्म करने का उपाय (How to Cure Fistula Permanently at Home in Hindi)

फिस्टुला का स्थाई इलाज करने के लिए घरेलू उपाय आपके लिए लाभकारी (How to Cure Fistula Permanently at Home in Hindi) हो सकते हैं। यदि समस्या अधिक बढ़ गयी है तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। आप इन नुस्खों को आजमाइए, नहीं तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सक से क्षारसूत्र करवाइये।

वायविडंग, हरड़ और आंवला करेगा भगन्दर को छूमंतर

सामग्री –

  • वायविडंग – 50 gm
  • हरड़ – 50 gm
  • बहेड़ा – 50 gm
  • सूखा आंवला – 50 gm
  • छोटी पीपल – 50 gm

इन पाँचों में से आंवला, बहेड़ा और हरड़ में गुठली होती है, उसे निकाल दें। ये पाँचों औषधियां आपको पंसारी की दुकान से मिल जाएंगी। इनको अच्छे से पीसकर चूर्ण बना लें और छानकर साफ़ डिब्बे में रख लें।

सेवन की विधि – नित्य इस चूर्ण (2 gm) को आधा चम्मच शहद के साथ मिलाकर सवेरे और सायंकाल चाटें। इस नुस्खे को 3 महीने तक करें और रोग यदि अधिक बढ़ गया है या बहुत पुराना है तो 6 माह तक इसका प्रयोग करें। ये नुस्खा वैद्य आर. एस. वर्मा द्वारा बताया गया है, इन्हें आयुर्वेद में 50 वर्ष का अनुभव है।

परहेज –

  • कब्ज़ न होने दें
  • तली-भुनी एवं अधिक मिर्च- मसाले वाली चीजें न खाएं
  • मांसाहार, धूम्रपान और शराब बिल्कुल बंद कर दें
  • खटाई का भी परहेज करें।
चमेली और बरगद के पत्तों से मिलेगा भगंदर से छुटकारा

सामग्री –

  • चमेली के 18 पत्ते
  • बरगद के 3 पत्ते
  • 1 चम्मच गिलोय का चूर्ण
  • 1 चम्मच सोंठ
  • 1 चम्मच सेंधा नमक

इन सभी चीजों को अच्छे से कूट लीजिये और कूटते हुए थोड़ी-थोड़ी छाछ मिलाते जाएँ। इसका अच्छे से लेप बना लीजिये और भगंदर वाले स्थान पर लगाइये। इसे एक महीने तक नियमित प्रयोग में लाएं। आप देखेंगे कि भगंदर जड़ से खत्म हो जाएगा।

केले से होगा भगंदर का अंत

सामग्री –

  • केला – 1 छोटा-सा टुकड़ा
  • देसी कपूर – 2 राइ के दाने बराबर

एक छोटे से केले के टुकड़े के अंदर कपूर का दाना दाल दें और उसे निगल जाएँ। इस प्रयोग को तीन दिन करके देखें, आश्चर्यजनक लाभ होगा। केला फाइबर से भरपूर होता है जो कब्ज़ को दूर करता। ये प्रयोग बवासीर और भगंदर दोनों के लिए बहुत उपयोगी है। दिन में केवल एक बार ही इसका सेवन करना है।

सावधानी – इसे खाने से एक घंटा पहले और बाद में कुछ न खाएं। इसे सुबह और शाम किसी भी समय ले सकते हैं।

मुलहठी, हल्दी और तिल के चूर्ण होगा भगंदर दूर

तिल का चूर्ण, हल्दी, मुलहठी और सेंधानमक – इन सबको समान मात्रा में लेकर बारीक पीस लें, फिर इसमें गोघृत मिलकर अच्छा पेस्ट-सा तैयार कर लें। इस पेस्ट को भगंदर वाले स्थान पर लगाएं। इससे काफी लाभ मिलेगा।

त्रिफला और दारुहल्दी का प्रयोग करेगा भगंदर का रोग दूर

त्रिफ़ला, दारुहल्दी, बेर के पत्ते और परवर के पत्ते से बने काढ़े भगंदर को धोना चाहिए। इससे भगन्दर का शोधन होता है और उससे होने वाले दर्द में भी आराम मिलता है।

भगन्दर होने पर क्या करें और क्या न करें

भगंदर होने पर अपने आहार और विहार दोनों में कुछ बदलाव करने होते हैं, जिससे इस रोग को ठीक करने में मदद मिलती है। आइये जानते हैं कि क्या करें और क्या न करें –

भग्नदफर में क्या खाना चाहिए

  • हल्का भोजन करें
  • पेट के बल अधिक देर न सोएं
  • फाइबर से भरपूर खाद्यपदार्थों का सेवन करें
  • उचित मुद्रा में बैठें और लेटे

क्या न करें –

  • ज्यादा मात्रा में भोजन न करें
  • कब्ज़ न होने दें
  • मैथुन का परित्याग करें
  • ज्यादा खट्टे, नमकीन और उष्ण पदार्थों का सेवन वर्जित है
  • दिन में न सोना लाभकारी है
  • उबड़ खाबड़ स्थान पर न बैठें
  • घुड़सवारी न करें

आयुर्वेद में क्षार सूत्र से भगन्दर का इलाज (fistula treatment in ayurveda in hindi)

इसके लिए रेशम के डोरे को क्षार द्रव्य, गोमूत्र, सेहुण्डदुग्ध और हल्दीचूर्ण के मिश्रण में बार-बार भावना देकर सुखाकर सुरक्षित रखा जाता है। भगन्दर को प्रोब (उपकरण) लगाकर ठीक से उसी दिशा और गति का ज्ञान कर लेने के बाद क्षारसूत्र को भगंदर में आर-पार डालकर बाँध दिया जाता है। इससे व्रण का पाक और छेदन ये दोनों क्रियायें होती हैं। क्षारसूत्र को प्रतिदिन कसकर बाँधा जाता है, इससे व्रण कट जाता है और रोपण भी होता है। क्षार क्रिया किसी अच्छे आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सक द्वारा ही करानी चाहिए।

कुछ सामान्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न – भगन्दर का स्थाई इलाज कैसे कर सकते हैं?

उत्तर – आयुर्वेद में क्षारसूत्र द्वारा भगन्दर का पक्का इलाज होता है। कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा भी इसका पक्का इलाज किया जा सकता है। क्षारसूत्र करवाने के बाद भगन्दर फिर कभी नहीं होता।

प्रश्न – बवासीर और भगंदर में क्या अंतर है?

उत्तर – बवासीर में मस्से होते हैं और भगन्दर में फोड़ा बन जाता है। बवासीर में मल के दौरान खून निकलता है और भगंदर में जब फोड़ा फुट जाता है तो खून निकलता है।

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