Home Remedies for Urine Infection in Ayurveda in Hindi

UTI : पेशाब की नली में इन्फेक्शन का आयुर्वेदिक उपचार | 7 Best Home Remedies for Urine Infection in Ayurveda in Hindi

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पेशाब की नली में इन्फेक्शन का आयुर्वेदिक उपचार Home Remedies for Urine Infection in Ayurveda in Hindi

UTI – यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन एक बहुत ही आम समय है जो किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। जिसे भी ये समस्या होती है, उसे बहुत ही कष्ट होता है और रोजमर्रा के जीवन को अव्यवस्थित कर देता है। अक्सर महिलाओं में ये समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक पाई जाती है।

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यूरिन इन्फेक्शन क्या है?

जब अलग-अलग वात,पित्त या कफ दोष स्वप्रकोप कारणों से प्रकुपित होकर अथवा सभी दोष प्रकुपित होकर बस्ति प्रदेश (Colon Region) में जाकर मूत्र के मार्ग में विकृति उत्पन्न कर पीड़ा पहुंचाते हैं, तब मनुष्य को कठिनाई से मूत्र आता है। इसे ही पेशाब की नली का इन्फेक्शन कहते हैं।

यूरिन इन्फेक्शन होने के कारण और लक्षण

शरीर में पित्त बढ़ने के साथ-साथ UTI होने के अनेकों कारण हो सकते हैं। साथ ही हम इनके लक्षणों के बारे में भी लिखेंगे। जैसा ही हमें किसी भी रोग के कारणों का पता लग जाए तो उस बीमारी का इलाज करना आसान हो जाता है।

स. कारण लक्षण
1अधिक मिर्च-मसाले वाल भोजन करने से कमर दर्द होना
2पेशाब की नली में बैक्टीरिया का संक्रमण होना जाँघों का भर जाना जिससे चलने में मुश्किल होती है
3ज्यादा टाइट अंतर्वस्त्र पहनने से पेट के निचले हिस्से में दर्द होना
4साफ़-सफाई का ध्यान न देने के कारण पेशाब करते हुए जलन और दर्द होना
5अधिक समय तक पेशाब वेग को रोकने की वजह से बहार-बार ऐसा लगना की मूत्र आया है परन्तु सिर्फ 2-4 बूँदें ही आना
6पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन कम करने से बुखार हो जाना और इसके साथ ठंड लगना
7बार-बार गुदा को संकुचित करते रहना अधिक इन्फेक्शन होने पर पेशाब में खून आना
8महिलाओं में मेनोपॉज़ के कारण पेशाब में बहुत बदबू आना और रंग अधिक पीला होना
9शुगर और किडनी में पथरी की समस्या की वजह से भूख न लगना और जो खाया है ऐसा लगना कि बाहर आ जाएगा

7 आसान घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार जो UTI की समस्या को ठीक करेंगे (Home Remedies for Urine Infection in Ayurveda in Hindi)

यूरिन इन्फेक्शन को दूर करने के लिए ऐसे घरेलू उपाय मौजूद हैं जिनके प्रयोग से आपको एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। आइये जानते हैं –

जीरा और मिश्री

2 ग्राम जीरा और 2 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर फंकी लेने से जो मूत्राशय के इन्फेक्शन के कारण पेशाब रुक-रुक कर आता है, वो खुलकर आने लगेगा और साथ ही पेशाब करते हुए जो जलन और पीड़ा होती है वो भी नहीं होगी।

ककड़ी और खीरे के बीज

ककड़ी का बीज, खीरे का बीज, बर्रे का बीज, अरूसे की पत्ती और केसर, इनका चूर्ण बनाकर मुनक्के के रस या काढ़े से पिलाना चाहिए। यह योग गुर्दे की पथरी के कारण होने वाले पेशाब के इन्फेक्शन और सभी प्रकार के मूत्राशय के इन्फेक्शन में लाभप्रद है।

मुलहठी और देवदारु

मुलहठी और देवदारु, इनकी बराबर मात्रा को चावल के धोवन के साथ पीना चाहिए। इसी प्रकार दारुहल्दी के चूर्ण को शहद मिलाकर आंवले के स्वरस के साथ पीने से यूरिन इन्फेक्शन ठीक होता है।

गिलोय और गोखरू का काढ़ा

गिलोय और गोखरू का काढ़ा 7 दिन नियमित सेवन करने से सभी प्रकार के मूत्राशय सम्बन्धी रोग नष्ट हो जाते हैं। यदि 7 दिन बाद पेशाब अधिक पीला आ रहा हो तो उसके अगले 7 दिन केवल गोखरू का काढ़ा पीएं।

दही

दही एक probiotic की तरह काम करती है मूत्र सम्बन्धी रोगों में, इसका सेवन आपको सुबह खाली पेट मायने शौच आदि से निवृत होकर करना चाहिए। 1 कटोरी दही लेकर उसे अच्छे से मत्थ लें और उसमें थोड़ी सी चीनी डालकर खाएं, ऐसे खाने से कुछ ही दिनों के भीतर आपको UTI की समस्या से राहत मिल जायेगी।

नीलकमल

जिन्हें मूत्र में रक्त आना शुरू हो गया है तो उनके लिए नीलकमल का दण्ड, ताड़ का फल, कास का मूल, पतली ईंख का मूल, गन्ने का मूल और कसेरू – इन सबका काढ़ा बनाकर मिश्री तथा शहद मिलाकर पीना चाहिए। इसके अलावा गन्ना चूसना, विदारीकंद और खीरा खाना चाहिए।

सहिजन

सहिजन के मूल का चूर्ण लेकर उससे 60 ml यूष (जूस) तैयार करें और उसे घी-तेल से छौंक दें। फिर ठंडा होने पर नमक तथा दही का पानी मिलाकर पीना चाहिए। यह पथरी को भी तोड़ देता है और सभी प्रकार के मूत्र सम्बन्धी रोगों को नष्ट कर देता है।

पेशाब की नली के इन्फेक्शन में क्या नहीं खाना चाहिए

हमें अपने खाने-पीने की आदतों में भी सुधार करना होगा क्यूंकि गलत खान-पान से भी यह रोग बढ़ता है। आइये जानते हैं कि हमें किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

  • ज्यादा मिर्च-मसाले और जंक फ़ूड का सेवन न करें।
  • कॉफ़ी, शराब जैसे पेय पदार्थों का सेवन बिल्कुल कम कर दें या ले ही न।
  • ज्यादा मीठी चीजों के सेवन से भी परहेज करें।
  • पैक्ड जूस और अन्य पैक्ड चीजों का सेवन न करें क्यूंकि इनमें अधिक मात्रा में चीनी और नमक होता है।
  • बेकरी आइटम्स से जितना हो सके दूर रहें।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – पेशाब में इन्फेक्शन कैसे हो जाता है?

उत्तर – अधिकतर मामलों में ये रोग बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है जैसे साफ़-सफाई का ध्यान न रखना, गंदा टॉयलेट यूज़ करना, स्त्री-प्रसंग के बाद गुप्तांग की सफाई न करना आदि। अन्य कारण हैं जैसे अधिक व्यायाम करना, तीक्ष्ण औषध और रूक्ष मद्य के सेवन से, तीव्र वेग के दौड़ने से, शुक्र वेग और मूत्र वेग को रोकने से।

प्रश्न – पेशाब की नली के इन्फेक्शन कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर – आयुर्वेद के अनुसार मूत्रकृच्छ्र तीन प्रकार के होते हैं। वातज, पित्तज और कफज इन तीनों प्रकारों में अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं।

प्रश्न – कौनसे योगासन UTI की समस्या को ठीक करने में उपयोगी हैं?

उत्तर – भद्रासन, पवनमुक्तासन और सर्वांगासन ये बहुत ही उपयोगी आसन हैं UTI को बिना दवा ठीक करने के लिए।

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