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जानें चिकुनगुनिया का घरेलू उपचार, कारण और लक्षण | 7 Home Remedies For Chikungunya in Hindi

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जानें चिकुनगुनिया का घरेलू उपचार, कारण और लक्षण Home Remedies For Chikungunya in Hindi

बरसात के मौसम में चिकुनगुनिया, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां अधिक होती हैं क्यूंकि इन दिनों मच्छरों का आक्रमण बढ़ जाता है। चिकुनगुनिया एक वायरल बिमारी है, इसके लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं, इसके साथ इसे हड्डी-तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है क्यूंकि इसमें जोड़ों और शरीर में बहुत दर्द होता है। मनुष्य को ऐसा लगता कि वह हिल-डुल भी नहीं सकता। इसका समय पर इलाज न कराया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

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Table of Contents

चिकुगुनिया क्या है और किस मच्छर के काटने से होता है?

चिकुगुनिया एक वायरल संक्रमण रोग है जो Aedes Aegypti और Aedes Albopictus प्रजाति के मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर रोगवाहक के रूप में कार्य करता है जैसे यदि वायरस ग्रस्त मच्छर किसी स्वस्थ मनुष्य को काटता है, तो मच्छर से वो वायरस निकलकर मनुष्य के शरीर में चला जाता है, जिसके कारण चिकुनगुनिया से व्यक्ति पीड़ित हो जाता है।

ये मच्छर मलेरिया के मच्छर से अलग है। ये दिन के समय ज्यादा काटते हैं। क्यूंकि ये बहुत ज्यादा ऊँचे नहीं उड़ सकते, इसलिए घुटनों के नीचे ही ज्यादा काटते हैं। घर के आस-पास पानी जहाँ इकठ्ठा होता है, वहां ये अधिक पनपते हैं। इसलिए पानी को इकठ्ठा न होने दें और बर्तनों को भी ढक कर रखें।

चिकुनगुनिया के लक्षण

आइये अब जानते हैं चिकुनगुनिया के लक्षण जोकि डेंगू के लक्षण से काफी मिलते-जुलते होते हैं, इन लक्षणों का पता लगने में 4-5 दिनों का समय लग जाता है –

चिकुनगुनिया के लक्षण

चिकुनगुनिया से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

मच्छरों से बचने के लिए आपको ये निम्नलिखित उपाय अवश्य अपनाने चाहिए ताकि डेंगू, चैगुण्गुनिया जैसी बीमारी से बचा जा सके –

  1. साफ़-सफाई का ध्यान रखें
  2. घर के आस-पास पानी न इकठ्ठा होने दें
  3. बाजू और पाँव को दिन के समय ढक कर रखें
  4. मच्छरदानी लगा कर सोएं
  5. कूलर में पानी को समय समय पर बदलते रहें
  6. जिस पात्र में पानी भरकर रखा है उसे हमेशा ढक कर रखें
  7. कपूर जलाने से भी मच्छर नहीं आते, आप इसका प्रयोग अवश्य करें

चिकुनगुनिया का घरेलू उपचार (Home Remedies For Chikungunya in Hindi)

देखिये अभी ऐसी कोई वैक्सीन नहीं बनी हैं लेकिन इसके लक्षणों का उपचार कर के इसे ठीक किया जा सकता है। आइये जानते हैं ऐसे प्रभावशाली घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खे –

तुलसी

तुलसी का पौधा लगभग हर घर में मौजूद होता है। इसके बहुत गुण हैं जिसके कारण इसे बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्दी-खांसी से लेकर अन्य भयंकर रोगों के इलाज में इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण मौजूद होते हैं जो किसी भी तरह के संक्रमण को दूर करते हैं और चिकुनगुनिया से होने वाले शारीरिक दर्द को भी दूर करते हैं, यह ज्वरनाशक भी है।

सेवन का तरीका – एक कप गर्म पानी लें और उसके अंदर 4-5 तुलसी के पत्ते डालकर ढक दें। जब थोड़ा गुनगुना हो जाए तो घूंट-घूंट करके पीएं। दूसरी विधि है कि 4-5 तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाकर उसमें शहद मिलाकर चाट लें। इससे इम्युनिटी बढ़ेगी और चिकुनगुनिया में बहुत आराम मिलेगा।

गिलोय

गिलोय सेहत के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। कोरोना काल में इसका उपयोग बहुत बड़ा है और लोगों को इससे फ़ायदा भी हुआ है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स गुण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं, जो हर प्रकार के वायरल इन्फेक्शन को दूर करने में उपयोगी हैं। चिकुनगुनिया के लक्षणों को ठीक करने में ये बहुत उपयोगी है।

प्रयोग करने का तरीका – गिलोय की 2-3 फुट लम्बी लता लें, इसे कूटकर 400 ml पानी में उबालें। जब पानी 100 ml रह जाए तो इसे छानकर रख लें। 2-2 चम्मच दो-दो घंटे के अंतराल पर रोगी को देते रहें। इससे प्लेटलेट्स बढ़ते हैं, रक्तचाप नियंत्रित रहता है, पल्स रेट और हार्ट बीट भी गिरने से बचाता है।

अनार

एक अनार सौ बीमार ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी। इसके मायने हैं एक अनार खाने से सौ बीमारियां ठीक की जा सकती हैं। चिकुनगुनिया में लिवर पर अधिक प्रभाव पड़ता है, इसके लिए आप अनार का सेवन करें जो बहुत ही लाभदायक है। इसके अंदर विटामिन k, C, आयरन, पोटैशियम, जिंक और ओमेगा-6 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।

सेवन की विधि – एक कटोरी में एक अनार के दाने निकाल लें और अच्छे से चबा चबा कर दिन 3-5 बार तक खाएं। जिन्हें चबाने में दिक्कत हो वो इसका जूस निकालकर भी पी सकते हैं। बाजार का पैक्ड जूस न पीएं, घर पर ही निकालकर पीएं।

लौंग

लौंग दर्द को दूर करने में बहुत ही उपयोगी होता है। इसमें फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है जो पेट के लिए काफी अच्छा होता है। चिकुनगुनिया में इसका प्रयोग इस प्रकार करें –

प्रयोग करने का तरीका – 5-6 लौंग को एक कप पानी में उबाल लीजिये, ध्यान रहे उसे थोड़ा कूटकर उबालें। फिर छानकर रख लें, थोड़ी थोड़ी देर में 2-2 चम्मच पीते रहें। दर्द को कम करती है, बुखार और पेट सम्बन्धी रोगों को दूर करती है। साथ ही जो अन्य लक्षण हैं चिकुनगुनिया के, उसे भी ठीक करती है।

अजवाइन

चिकुनगुनिया के उपचार में अजवाइन बहुत ही उपयोगी है। इसे दर्दनाशक माना जाता है। आप इसे 2 तरीकों से प्रयोग में ला सकते हैं –

प्रयोग का तरीका – अजवाइन को तिल के तेल में पकाकर उससे जोड़ों पर मालिश करें, दर्द में आराम मिलेगा। इसके साथ आप अजवाइन का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। 1 कप पानी में आधा चम्मच अजवाइन मिलाकर उबाल लें और थोड़ी थोड़ी देर में घूंट-घूंट पीते रहें। चिकुनगुनिया से जो सूजन आ जाती है, उसे भी ठीक करती है।

चद्रप्रभावटी और पुनर्नवादि मंडूर

बाबा रामदेव बताते हैं कि चद्रप्रभावटी और पुनर्नवादि मंडूर चिकुनगुनिया में रामबाण औषधियां हैं। चद्रप्रभावटी जोड़ों के दर्द को एकदम ठीक कर देती है और पुनर्नवादि मंडूर सूजन को गायब कर देती है, साथ ही लिवर को अच्छा कर देती है। क्यूंकि चिकुनगुनिया में लिवर अधिक प्रभावित होता है, इसलिए ये दोनों औषधियां बहुत ही उपयोगी हैं।

सेवन की विधि – 2-2 गोलियां सुबह दोपहर शाम को खाएं। लेकिन पहले किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक से इसकी सलाह अवश्य लें।

पांच चीजों का रस जो चिकुनगुनिया में बहुत ही उपयोगी है

अनार का रस, एलोवेरा का रस, गेहूं के ज्वारे का रस, पपीते के पत्तों का रस और गिलोय का रस – इन पाँचों रसों को एकसाथ लें और इसका सेवन 2-2 घंटे बाद 2 चम्मच करते रहें। बाबा रामदेव पूरे आत्मविश्वास से कहते हैं कि इस रस का सेवन करने से आपको पहले दिन से ही फर्क दिखना शुरू हो जाएगा।

चिकुनगुनिया के बाद होने वाले जोड़ों के दर्द से पाएं छुटकारा इस आसान तरीकों से

पहले ही बताया गया है कि चिकुनगुनिया को हड्डीतोड़ बुखार (Home Remedies For Chikungunya in Hindi) कहते हैं। इसके ठीक होने बाद भी ये जोड़ों में काफी दिनों तक या कभी कभी तो 10-20 सालों तक भी दर्द रहता है। कुछ उपाय हैं जो जोड़ों के दर्द की समस्या को ठीक कर देंगे, आइये जानते हैं –

  • कनेर की पत्ती उबालकर पीस लें और मीठे तेल में मिलाकर लेप करें, इससे जोड़ों का दर्द दूर होता जाता है।
  • कड़वे तेल में अजवाइन और लहसुन जलाकर उस तेल की मालिश करने से हर प्रकार का बदन दर्द दूर हो जाता है।
  • नियमित योग और प्राणायाम करें, इससे शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है और सभी के दर्द दूर हो जाते हैं।
  • चंद्रप्रभावटी और पुनर्नवादि मंडूर की 2 गोलियां सुबह, दोपहर, शाम को खाएं। चिकुनगुनिया के बाद होने वाले जोड़ों के दर्द में राहत मिलेगी।
  • अश्वगंधा भी हमारे शरीर को ताकत देता है जिससे जोड़ों के दर्द में भी काफी आराम मिलता है। इसका सेवन अपने शरीर की प्रवृत्ति के अनुसार करना चाहिए या आयुर्वेदिक चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए।
  • गाजर और अंगूर जैसे फल और सब्जियां भी चिकुनगुनिया के बाद होने वाले राहत पहुंचाते हैं।

चिकुनगुनिया में क्या खाएं और क्या न खाएं

हमें खाने-पीने की आदतों में कुछ सुधार करना होगा जिससे हम जल्दी ही इस बिमारी को हराकर पूर्ण रूप से स्वस्थ हो सकेंगे। आइये जानते हैं हमें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं –

क्या खाएं

  • फलों में अंगूर, अनार और केले का सेवन करें
  • सब्जियों हरी सब्जियां और गाजर बहुत उपयोगी है
  • अदरक और काली मिर्च का सेवन बहुत ही अच्छा है
  • नीम्बू और शहद का भी उपयोगी है
  • डेरी प्रोडक्ट्स भी लाभदायक है, खासतौर पर दूध अवश्य लें, ये कमजोरी और थकान को दूर करता है
  • नट्स भी खाएं, ये मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया को तेज करते हैं और इम्युनिटी को बढ़ाते हैं

क्या न खाएं

  • बाहर का खाना अवॉयड करें
  • जंक फ़ूड का सेवन बिल्कुल वर्जित है
  • packed juice भी नहीं पीना चाहिए
  • शराब, सिगरेट आदि मादक पदार्थों का प्रयोग न करें
  • ज्यादा तला हुआ भोजन न खाएं
  • गरिष्ठ भोजन भी न करें क्यूंकि इससे पाचन तंत्र खराब हो सकता है

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – चिकुनगुनिया और डेंगू बुखार के लक्षणों में क्या अंतर है?

उत्तर – 1. वैसे तो दोनों में लगभग लक्षण एक जैसे ही हैं लेकिन चिकुनगुनिया का पता लगने में जहाँ 7 से 15 दिनों का समय लगता है, वहीँ डेंगू में 2 से 5 दिनों का।
2. डेंगू में पूरे शरीर में दर्द होता है और चिकुनगुनिया में joints pain ज्यादा होता है।
3 डेंगू में सूजन नहीं होती लेकिन चिकुनगुनिया में शरीर के कई हिस्सों में सूजन भी आ जाती है

प्रश्न – क्या चिकुनगुनिया की कोई वैक्सीन या दवाई है?

उत्तर – जी नहीं, अभी तक इसकी कोई भी वैक्सीन नहीं आयी है। लेकिन इसके लक्षणों का इलाज करके हम इस बीमार को ठीक कर सकते हैं।

प्रश्न – चिकुनगुनिया कितने दिनों में ठीक हो जाता है?

उत्तर – पहले तो इसके लक्षणों का पता ही 7 से 15 दिनों में लगता है। ये आपकी इम्युनिटी पर निर्भर करता है कि आप कितने दिनों में इस रोग से ठीक हो सकेंगे। यदि इसका उपचार सही समय पर न किया जाए तो इसका प्रभाव कई वर्षों तक रहता है। हड्डियों में दर्द और पाचन तंत्र की समस्या लम्बे समय तक बनी रहती है।

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