Home Remedies for Baby Cough & Chest Congestion in Hindi

बच्चों को खांसी और सीने में जकड़न के कारण और घरेलू उपचार | 9 Home Remedies for Baby Cough & Chest Congestion in Hindi

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बच्चों को खांसी और सीने में जकड़न के कारण और घरेलू उपचार Home Remedies for Baby Cough & Chest Congestion in Hindi

सर्दियां की शुरुआत हो गयी है और इस मौसम में बच्चों को खांसी एवं छाती में कफ जमने की समस्या भी शुरू हो जाती है। बच्चों को तकलीफ में देखते ही माँ-बाप भी बहुत परेशान हो जाते हैं और घबरा जाते हैं कि अब करें तो करें क्या? खांसी की समस्या वैसे तो आम है लेकिन कई बार ये ठीक होने में अधिक समय लगा देती है। लेकिन अब घबराने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि खांसी और सीने में जड़कं की समस्या को दूर करने के लिए बहुत ही जबरदस्त घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार हैं। लेकिन उससे पहले जानेंगे इसके कारण और लक्षण –

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बच्चों में खांसी के कारण और खतरे के लक्षण

बच्चों को या बड़ों को खांसी होती है तो उससे घबराएं नहीं क्यूंकि ये एक प्रोटेक्टिव रिफ्लेक्स है। ये हमें फेफड़ों में होने वाले इन्फेक्शन से बचाती है। इसे दबाना नहीं है बस ये ध्यान देना कि बच्चों में कोई खतरे वाले लक्षण तो नहीं दिख रहे। आइये कारण और लक्षण दोनों पर नजर डालते हैं –

स.कारण लक्षण
1रोग-प्रतिरोधक क्षमता का कम होनासांस का तेजी से चलना
2प्रदूषण भी बहुत बड़ी वजह है खांसी कीगहरी और लम्बी साँसें लेना
3बच्चों का शरीर सर्दियों में तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाताखाना-पीना बिल्कुल कम होना
4गर्म-सर्द की वजह से जैसे ठंडे के ऊपर गर्म खा लेना या गर्म के ऊपर ठंडा खा-पी लेनापानी की प्यास न लगना
5वायरल इन्फेक्शन के कारणपेशाब भी बहुत कम होना
6चक्कर आना या बेहोशी होना
7आँखें लाल हो जाना
8आँखों से पानी आना
9बच्चे की छाती में घरघराहट की आवाज़ होना

बच्चों में खांसी और सीने में जकड़न के घरेलू उपचार (Home Remedies for Baby Cough & Chest Congestion in Hindi)

बच्चों में अलग-अलग उम्र के अनुसार अलग-अलग ही घरेलू उपचार किये जाते हैं। तो पहले हम जानते हैं जो जन्म से लेकर 9 महीने तक के बच्चों की खांसी में क्या घरेलू उपचार किया जाए –

शिशुओं में सर्दी-खांसी के घरेलू उपचार- उम्र – 0 से 9 माह तक (Home Remedies for Cough & Cold in Infants in Hindi)

डॉ शांडिल्य के अनुसार नवजात शिशु माता के गर्भ से ही प्रतिकार शक्ति लेकर पैदा होता है इसलिए वह 9 माह तक ज्यादातर स्वस्थ ही रहता है लेकिन फिर भी यदि कई बार सर्दी-खांसी की समस्या हो जाए तो माँ-बाप को घबराना नहीं चाहिए और घरेलू नुस्खों का प्रयोग ही करना चाहिए जैसे –

अजवाइन(1/2 कप) को पैन में हल्का गर्म कर लें और इसे किसी साफ़ सूती कपड़े में बांधकर शिशु की नाक के नजदीक रख दें। इसकी सुगंध से छाती में जो कफ जमा है वो पिछलने लगेगा और खांसी में भी काफी लाभ मिलेगा। 
4-5 चम्मच सरसों के तेल में 2 कलियाँ लहसुन की डालकर हल्का गर्म कर लें। इसके बाद इस तेल से बच्चे के हाथ, पैर, छाती और पीठ की हल्के हाथों से मसाज करें। इससे बच्चे को सर्दी-खांसी और जकड़न में बहुत आराम मिलेगा और वह रोयेगा भी नहीं। 
नवजात शिशु को ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ देना चाहिए क्यूंकि अब इस उम्र बच्चा सिर्फ माँ का दूध ही पी सकता है तो माँ को शिशु को अपना दूध ही पिलाना चाहिए। इससे श्लेष्म झिली को नमि मिलेगी और शिशु में चिड़चिड़ापन भी कम होगा। माँ के दूध में एंटीबाडीज होती हैं जो शिशु की खांसी को ठीक करने में काफी उपयोगी हैं। 
शिशु के सिर के नीचे कोई सिरहाना या मोटा कम्बल रख दें जिससे उसका सिर थोड़ा ऊँचा हो जाए। इससे उसे सांस लेने में आसानी होगी और नींद भी अच्छे से आ जायेगी। 

उम्र 9 माह से 2 वर्ष तक

अदरक के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर शिशु को चटाइये। इससे खांसी, छाती में जकड़न और सर्दी की समस्या से तुरंत लाभ मिलेगा। ये प्रमाणित नुस्खा है। 
5 चम्मच नारियल के तेल में थोड़ी-सी कपूर मिलाएं और इसे अच्छे से घुलने दें। इसे गैस पर हल्का-सा गर्म कर लें और बच्चे की छाती, बैक और कानों के पीछे हल्के हाथों से मसाज करें। छाती से घरघराहट की आवाज आना, खांसी और जुकाम में राहत मिलेगी। 
1-1 चम्मच मेथी और सोंठ, 5 काली मिर्च - इन सभी को अच्छे से कूट लें और मिक्स कर लें। फिर 1 गिलास पानी में डालकर अच्छे से उबालें और बच्चों को 1-1 चम्मच करके सुबह, दोपहर और शाम को पिलायें। छाती में जमा कफ, सर्दी-खांसी में अत्यंत लाभकारी है। 

2 वर्ष के ऊपर के बच्चे

3-4 तुलसी की पत्तियां, 3 काली मिर्च और 2 लौंग 1 कप पानी में अच्छे से उबाल लें और फिर उसे हल्का गर्म रहने तक रख दें। तत्पश्चात इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और बाचे को 2 चम्मच तक पीने को दें। ऐसा ही इसे दिन में 3-4 बार तक तक 1-2 चम्मच देते रहें। इससे खांसी और सीने की जकड़न में अत्यंत लाभ मिलेगा। 
दूध में एक कली लहसुन की मिलाकर गर्म कर लें और उसमें दो चुटकी हल्दी मिलाकर बच्चे को पीने को दें। ये किसी एंटीबायोटिक से कम नहीं है। गजब का फ़ायदा होगा इस प्रयोग से क्यूंकि ये भी प्रमाणित है। बच्चे की खांसी, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नींद न आना और छाती में घरघराहट की आवाज़ होना सभी में उपयोगी है। 
बच्चों को बेसन का पूड़ा बनाकर खिलाएं। इससे सर्द-खांसी में तुरंत लाभ मिलता है। मेरी दादी भी मुझे सर्द-खांसी होने पर बेसन का पूड़ा खिलाती थी। 

सर्दी-खांसी और सीने में जकड़न होने पर बच्चों को कैसा भोजन देना चाहिए

भोजन का विशेष रूप देना चाहिए क्यूंकि कफ के बिगड़ने से ये समस्या होती है इसलिए कफ वर्धक आहार का सेवन नहीं करना चाहिए जैसे –

  • फ्रिज का ठंडा पानी बच्चों को न पीने दें
  • आइस क्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स से दूरी बनाये रखें
  • मिठाइयां भी बिल्कुल न खाने दें
  • तली चीजों से बच्चों को दूर रखें
  • डेरी प्रोडक्ट्स से भी कुछ दिन दूरी बनाकर रखें
  • सूर्यास्त के बाद दूध का सेवन भी न करें क्यूंकि इससे कफ बढ़ता है

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न – छोटे बच्चे को सर्दी लगने पर क्या करें?

उत्तर – थोड़ा-सा देसी घी लें, इसे हल्का गर्म कर लें और इसकी मसाज हल्के हाथों से बच्चे के शरीर पर करें। गर्म कपड़े पहनाएं।

प्रश्न – बच्चे का नाक बंद हो जाए तो कैसे खोलें?

उत्तर – ध्यान दें क्या बच्चे का डायपर गीला तो नहीं हो गया उसकी वजह से भी सर्दी लग सकती है और नाक बंद हो जाता है। इसके आपको बच्चे को स्टीम देनी चाहिए और नमक वाले पानी की 1-1 बूँद नाक में डालनी चाहिए। काफी लाभ मिलेगा।

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