Ashwagandha Benefits in Hindi

अश्वगंधा के फायदे, सावधानियां और प्रयोग करने का प्रमुख नुस्खा | 15 Amazing Ashwagandha Benefits in Hindi

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अश्वगंधा के फायदे, सावधानियां और प्रयोग करने का प्रमुख नुस्खा Ashwagandha Benefits in Hindi

दुनियाभर में पेड़-पौधों से मिलने वाली ऐसी ढेरों जड़ी-बूटियां हैं जो शरीर की थकान और तनाव को दूर करती है तथा शरीर को ऊर्जा देकर ताकत को बढ़ाती हैं। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है जिसका नाम है अश्वगंधा जिसे आयुर्वेद में काफी औषधि माना जाता है।

अश्वगंधा का नाम सुनते ही दिमाग में पहली बात यही आती है कि ये तो पुरुषों के लिए ही उपयोगी है और ये तो सिर्फ यौन क्षमता को बढ़ाने के लिए ही प्रयोग की जाती है। देखिये इन दोनों बातों में कोई संदेह नहीं है। परन्तु ये महिलाओं के लिए भी उतनी ही उपयोगी है जितनी पुरुषों के लिए और ये शरीर के अन्य रोगों को ठीक करने में सहायक है।

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Table of Contents

अश्वगंधा क्या है?

अश्वगंधा एक आयुर्वेदिक औषधि है जो जिनसेंग के समतुल्य मानी जाती है और इसके कुछ प्रभाव भी जिनसेंग के समान ही हैं। अश्वगंधा का अर्थ है – घोड़े की गंध। इसकी ताजा पत्तियों तथा जड़ों में घोड़े के मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा। वैश्विक बाजार में यह व्यापक स्तर पर स्वीकार्य और प्रयोग होने वाली जड़ी-बूटी है।

अश्वगंधा के फायदे (Ashwagandha Benefits in Hindi)

जो लोग ये समझते हैं कि इसके सिर्फ यौन सम्बन्धी लाभ हैं, वे इन निम्नलिखित फायदों को पढ़कर हैरान रह जाएंगे –

पाचन तंत्र को करे मजबूत

अश्वगंधा जठराग्नि को प्रदीप्त करके भूख को बढ़ाती है। शरीर में वात को नियंत्रित करती है, जिससे पेट में गैस बनने जैसी समस्या नहीं होती। जिनके पेट में कीड़े होते हैं, वे भी इसके सेवन से नष्ट हो जाते हैं।

श्वसन तंत्र को बनाये मजबूत

अश्वगंधा कफ को हरने वाली है। जिसे बलगम वाली खांसी है उसके लिए ये बहुत ही उपयोगी है। ये दमा को ठीक करने में भी अहम भूमिका निभाती है। इसके लिए आपको अश्वगंधा के चूर्ण को शहद के साथ लेना चाहिए। आपको सांस चढ़ने और खांसी जैसी समस्या से मुक्ति मिल जायेगी।

रक्त को शुद्ध करती है

जिन लोगों को सफेद दाग हो जाते हैं, उन्हें इसके सेवन से बहुत लाभ मिलेगा। ये रक्त को शुद्ध करके सौंदर्य को बढ़ाती है। इसके साथ-साथ ये हाइपरटेंशन के रोगियों के लिए भी ये रामबाण औषधि है। हाई बीपी के कारण जिनके पैरों में सूजन आ जाती है, उसके लिए भी बहुत कारगर है।

डर, तनाव और चिंता से करे मुक्त

जिन व्यक्तियों को डर लगता है, हमेशा तनाव में रहते हैं या जिनकी दिल की धड़कन बढ़ जाती है, उन्हें अश्वगंधा का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके साथ ही जिन्हें insomnia यानि नींद न आने की दिक्क्त है, उनके लिए भी ये बहुत ही उपयोगी है।

ट्यूमर और कैंसर को ठीक करने में भी है मददगार

इसके प्रयोग से कैंसर के रोगियों को भी लाभ मिलता है। अश्वगंधा के प्रयोग से कैंसर सेल की ग्रोथ रूकती है। जो रोगी केमोथेरपी करा रहे हों, उसकी पीड़ा को सहने और कैंसर को रोकने में सहायक सिद्ध होता है।

पैरालिसिस को करे ठीक

अश्वगंधा मांसपेशियों को ताकत प्रदान करती और muscle को टोन करती जिससे ये पैरालिसिस को ठीक करने में भी उपयोगी है। इसमें भी आपको इसकी जड़ के चूर्ण को दूध के साथ लेना है।

कोलेस्ट्रॉल को घटाती है

जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया और उसकी वजह से नसों में भी ब्लॉकेज हो गयी है तो इस समस्या के निदान के लिए अश्वगंधा का प्रयोग आपके लिए चमत्कारी सिद्ध हो सकता है।

अश्वगंधा की पत्तियों और जड़ की खासियत

  1. अश्वगंधा की पत्तियां –

इसकी पत्तियों में एंटीऑक्सिडेंट्स और एनाल्जेसिक जैसी प्रॉपर्टीज पायी जाती हैं जो ठंड लगना, खांसी और हल्के बुखार को ठीक करने में उपयोगी हैं।

2. अश्वगंधा की जड़ –

ये तो कई प्रकार के गुणों से भरपूर है जैसे antidepressant. एंटी-डायबिटिक , रसायन और वाजीकरण (धातु को बांधना ), जोकि इसको काफी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बनाता है।

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों और महिलाओं के लिए

अश्वगंधा सिर्फ पुरुषों के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के लिए भी उतनी ही फायदेमंद है। आइये जानते हैं इसके होने लाभ जो पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए हैं –

स. पुरुषों के लिए लाभ महिलाओं के लिए लाभ
1.शरीर की उत्कंठा, बेचैनी व घबराहट को शांत करता है। महिलाओं में श्वेत प्रदर और अधिक रक्तस्त्राव जैसी समस्याओं में लाभकारी है।
2.यह शरीर की ग्रंथीय और यौन कार्यप्रणाली, दमखम और ऊर्जा को पुनर्जीवित करने के लिए जाती जाती है। जिन्हें बार-बार गर्भपात हो रहा है, वे इसका सेवन अवश्य करें।
3.यौन क्षमता बढ़ाने के साथ ही शुक्राणुओं की संख्या भी बढ़ाती है। महिलाओं के शरीर में आयरन को बढ़ाकर खून की कमी को दूर करती है।
4.इससे आलस्य नहीं रहता। जिन्हें सेक्स के दौरान थकान होती है, उन्हें काफी लाभ मिलता है। इसके सेवन से प्रजनन क्षमता बढ़ती है।
5.इसकी जड़ शक्तिवर्धक, शुक्राणु वर्धक और पौष्टिक होती है। यह शरीर को बलवान बनाती है। ये गर्भाशय की मांसपेशियों को बल प्रदान करने वाली है।
6.यह वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या को जड़ से खत्म करती है। स्त्रियों में कमर दर्द की समस्त=या को दूर करने वाली है।
7. लिंग में नसें की कमजोरी को दूर करती है।

अश्वगंधा की मात्रा व सेवन विधि

अश्वगंधा की कई किस्में बाजार में मिलती हैं जैसे टेबलेट, कैप्सूल और चूर्ण। आयुर्वेद में इसके क्वाथ का प्रयोग भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है।

  • अचानक दर्द होने पर – 12 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को यदि अचानक कहीं भी दर्द हो गयी है तो 1/2 चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण पानी के साथ ले लो। और यही 18 वर्ष से ऊपर के लोग इसकी मात्रा 1 चम्मच कर दें।
  • छींके, एलर्जी और साइनस में – साइनस में सुबह और शाम एक छोटा चम्मच अश्वगंधा के चूर्ण को गर्म पानी के साथ फांक लो।
  • धात के गिरने पर – जिन्हें धात गिरने की समस्या है, वे इसके चूर्ण को दूध के साथ लें। 1 चम्मच चूर्ण को रात को सोते समय दूध के लेने से शरीर में बल वृद्धि करता है।
  • दमा के रोगी के लिए – इसमें अश्वगंधा को उबालकर इसका काढ़ा तैयार किया जाता है। इसमें भी 1 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण लेना है और साथ ही थोड़ा-सा घी और शक्कर मिला देनी है। इस काढ़े को पीने से दमा का रोग धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है।

सावधानियां

  • अश्वगंधा के जरूरत से ज्यादा सेवन से पेट में गैस, दस्त आदि की समस्या हो सकती है। ज्यादा सेवन से यह आँतों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
  • ज्यादा सेवन से ज्यादा नींद आती है और यदि ज्यादा सेवन जारी रहता है तो नींद आनी बंद भी हो सकती है। इसलिए अश्वगंधा का सेवन नियमित मात्रा में ही करना चाहिए।
  • अन्य किसी अन्य रोग की दवा ले रहे हैं तो अश्वगंधा का प्रयोग नहीं चाहिए क्यूंकि यदि शरीर में अश्वगंधा का अंश जा रहा है तो यह अन्य दवा को शरीर में नहीं लगने देती।
  • अश्वगंधा के ज्यादा सेवन से शरीर का तापमान बढ़ता है। ज्यादा सेवन से बुखार भी सकता है। इसलिए गर्मी के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अल्सर की समस्या वाले लोगों को और गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

जितनी भी आयुर्वेदिक औषधियां होती हैं, इन्हें हमेशा किसी कुशल आयुर्वेदिक वैद्य के परामर्श से ही लेना चाहिए क्यूंकि इसमें पहले औषधि की तासीर देखि जाती है, फिर उस मनुष्य की शरीर की प्रवृत्ति देखि जाती है। फिर उसके बाद जाके उस औषधि की मात्रा तय की जाती है।

अधिकतर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न- अश्वगंधा कहाँ पाया जाता है?

उत्तर- भारत में अश्वगंधा का उत्पादन राजस्थान और मध्यप्रदेश में सूखी, बेकार भूमि पर पाया जाता है। चीन और कोरिया जैसे देशों में भी उगाई जाती है। यह एक आधार-भूत जड़ी बूटी है।

प्रश्न- अश्वगंधा कितनी मात्रा में खाना चाहिए?

उत्तर- वैसे तो इसकी मात्रा मनुष्य के शरीर की प्रवृत्ति देखकर तय की जाती है। परन्तु जो सबसे सुरक्षित मात्रा है वो है 1 चम्मच अश्वगंधा का चूर्ण।

प्रश्न- अश्वगंधा लेते समय क्या परहेज करना चाहिए?

उत्तर- यदि कोई अन्य दवाई का सेवन कर रहे हैं तो अश्वगंधा का सेवन न करें। यदि वाजीकरण के लिए इसका उपयोग कर रहें हैं तो मैथुन आदि क्रिया से दूर रहें जब तक इसका सेवन कर रहे हैं।

प्रश्न- अश्वगंधा का सेवन कितने दिन करना चाहिए?

उत्तर- आयुर्वेद के अनुसार यदि मनुष्य में कोई दोष नहीं है तो उसे केवल 7 दिन ही इसका सेवन करना चाहिए। कमजोर व्यक्ति को 30-60 तक इसका प्रयोग करना चाहिए और वो भी केवल सर्दियों में। बाकी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें।

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